मानसून में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा
MONSOON HERD HEALTH PROTOCOL
बारिश के चार महीने पशुपालक के लिए सबसे जोखिम भरे होते हैं। इसी दौरान बीमारी, परजीवी और दूध में गिरावट सबसे ज़्यादा होती है। सही समय पर उठाया गया कदम पूरे साल की कमाई बचाता है।
अडवाइजरी इंफोग्राफिक पोस्टर (Infographic Sheets)


बीमारी का जोखिम — महीने के हिसाब से RISK CALENDAR
तैयारी — कृमिनाशक व टीकाकरण पूरा करें
कीचड़, मक्खी, किलनी — खुरपका व थनैला का खतरा (मानसून के अंत में)
सर्वाधिक जोखिम — गलघोंटू, लंगड़ा बुखार, लंपी
दोबारा कृमिनाशक — परजीवी भार चरम पर
1. मानसून की पाँच ज़रूरी क्रियाएँ THE FIVE MONSOON ACTIONS
| क्या करें (ACTION) | कब (WHEN) | ध्यान रखने की बात (KEY NOTES) |
|---|---|---|
कृमिनाशक दवा DEWORMING | बारिश शुरू होने से पहले, और मानसून के अंत में | दवा का समूह हर बार बदलें, वरना कीड़ों में प्रतिरोध बन जाता है। मात्रा पशु के वज़न पर तय होती है — पशु चिकित्सक से पूछें। |
टीकाकरण VACCINATION | मानसून से पहले (मई–जून) पूरा करें | गलघोंटू (HS) और लंगड़ा बुखार (BQ) बारिश से पहले। खुरपका–मुँहपका (FMD) सरकारी अभियान के अनुसार। |
सूखा व ऊँचा बाड़ा DRY, RAISED SHELTER | बारिश भर, रोज़ जाँचें | पानी न भरे, निकासी बनाएँ। गीली ज़मीन से खुर सड़न और थनैला होता है। बिछावन रोज़ बदलें। |
चारा व पानी FEED & WATER | हर दिन | फफूँद लगा या भीगा चारा कभी न दें। हरा चारा ज़्यादा नरम हो तो सूखे चारे के साथ मिलाएँ — अफारा से बचाव। पानी साफ़ और ताज़ा। |
किलनी व मक्खी नियंत्रण TICK & FLY CONTROL | जुलाई–सितंबर | किलनी और मक्खी लंपी व अन्य रोग फैलाती हैं। बाड़े की सफ़ाई, गोबर का समय पर निपटान, चिकित्सक की सलाह से बाहरी परजीवीनाशक। |
💡 दवा का समूह हर बार बदलें, वरना कीड़ों में प्रतिरोध बन जाता है। मात्रा पशु के वज़न पर तय होती है — पशु चिकित्सक से पूछें।
💡 गलघोंटू (HS) और लंगड़ा बुखार (BQ) बारिश से पहले। खुरपका–मुँहपका (FMD) सरकारी अभियान के अनुसार।
💡 पानी न भरे, निकासी बनाएँ। गीली ज़मीन से खुर सड़न और थनैला होता है। बिछावन रोज़ बदलें।
💡 फफूँद लगा या भीगा चारा कभी न दें। हरा चारा ज़्यादा नरम हो तो सूखे चारे के साथ मिलाएँ — अफारा से बचाव। पानी साफ़ और ताज़ा।
💡 किलनी और मक्खी लंपी व अन्य रोग फैलाती हैं। बाड़े की सफ़ाई, गोबर का समय पर निपटान, चिकित्सक की सलाह से बाहरी परजीवीनाशक।
2. ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक बुलाएँ CALL THE VET THE SAME DAY
तेज़ बुखार, नाक बहना
गलघोंटू का शुरुआती संकेत
अचानक लंगड़ाना, पैर में सूजन
लंगड़ा बुखार या खुर सड़न
खाल पर गाँठें
लंपी त्वचा रोग
थन में सूजन, दूध में फटकन
थनैला — दूध अलग रखें
पतला या खून वाला गोबर
परजीवी या संक्रमण
चारा छोड़ना, दूध गिरना
पहली चेतावनी — अनदेखी न करें
3. करें और न करें DO AND DON'T
करें DO
- ✓बीमार पशु को बाकी झुंड से तुरंत अलग करें
- ✓दवा और टीके की तारीख़ रजिस्टर में लिखें
- ✓दूध निकालने से पहले हाथ और थन साफ़ करें
- ✓खनिज मिश्रण नियमित दें
- ✓बछड़ों पर अलग ध्यान — जोखिम सबसे ज़्यादा उन्हीं को
न करें DON'T
- ✕अंदाज़े से दवा की मात्रा न दें — कम मात्रा प्रतिरोध बनाती है
- ✕दवा देने के बाद दूध निकासी अवधि की अनदेखी न करें
- ✕गर्भवती पशु को बिना सलाह कृमिनाशक न दें
- ✕भीगा, फफूँद लगा चारा न खिलाएँ
- ✕बीमारी बढ़ने का इंतज़ार न करें



